Breaking: 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय नौसेना ने ऐसा रणनीतिक दांव खेला कि पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) में फंसी पाकिस्तानी सेना के पास समुद्र के रास्ते भागने का भी कोई मौका नहीं बचा। इस युद्ध के अंत में बांग्लादेश एक नए देश के रूप में उभरा।
आज जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, तब 1971 की वही ऐतिहासिक घटना याद आती है। उस समय भी समुद्री नाकेबंदी ने युद्ध का रुख बदल दिया था।
पूर्व नौसेना प्रमुख एस.एम. नंदा ने अपनी किताब “The Man Who Bombed Karachi” में बताया है कि 1960 के दशक तक यह माना जाता था कि युद्ध में नौसेना की भूमिका सीमित होती है। लेकिन 1971 में भारतीय नौसेना ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया।
भारत ने पहले ही रणनीति बनाकर पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान के बीच संपर्क तोड़ने की योजना तैयार कर ली थी। युद्ध शुरू होने से पहले ही भारत ने अपना एयरस्पेस पाकिस्तान के लिए बंद कर दिया, जिससे समुद्री रास्ता ही एकमात्र विकल्प बचा। इसी मौके का फायदा उठाते हुए भारतीय नौसेना ने बंगाल की खाड़ी में मजबूत नाकेबंदी कर दी।
INS विक्रांत को तैनात किया गया और चटगांव जैसे अहम बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों को रोक दिया गया। कई पाकिस्तानी जहाजों को गुप्त मिशनों में नष्ट भी कर दिया गया। इसके कारण पूर्वी पाकिस्तान में मौजूद पाकिस्तानी सेना तक न हथियार पहुंच पाए, न राशन।
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दूसरी ओर, भारतीय सेना और मुक्ति वाहिनी जमीन पर लगातार दबाव बना रहे थे। समुद्र, जमीन और आसमान से हो रहे हमलों ने पाकिस्तान को पूरी तरह घेर लिया। 3 दिसंबर 1971 को युद्ध शुरू होते ही भारत पूरी तैयारी में था।
विक्रांत से उड़ान भरने वाले लड़ाकू विमानों ने चटगांव, कॉक्स बाजार, खुलना और मोंगला जैसे ठिकानों पर जोरदार हमले किए। बंदरगाह, ईंधन डिपो और सप्लाई नेटवर्क तबाह हो गए। हालांकि भारत ने आधिकारिक रूप से नाकेबंदी की घोषणा नहीं की थी, लेकिन उसका असर साफ दिख रहा था।
इस नाकेबंदी के कारण पाकिस्तानी सेना पूरी तरह अलग-थलग पड़ गई। न उन्हें मदद मिल सकती थी और न ही वे वहां से निकल सकते थे। हालात इतने खराब हो गए कि आखिरकार 16 दिसंबर 1971 को लेफ्टिनेंट जनरल ए.ए.के. नियाज़ी ने 93,000 सैनिकों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया।
यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य सरेंडर माना जाता है और इसी के साथ बांग्लादेश एक स्वतंत्र देश के रूप में सामने आया।
