Iran–United States: पश्चिम एशिया में दो हफ्तों के सीजफायर ऐलान का असर अब साफ तौर पर वैश्विक ऊर्जा बाजार में दिखने लगा है। इस कूटनीतिक कदम के बाद कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। Israel-Iran और United States के बीच तनाव के बीच हुए इस समझौते ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत दी है। खासकर India जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए यह बड़ी खुशखबरी साबित हो रही है।
पश्चिम एशिया में अस्थिरता का सीधा असर Strait of Hormuz पर पड़ता है, जिसे दुनिया की सबसे अहम तेल आपूर्ति लाइन माना जाता है। वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
होर्मुज में तनाव से बढ़ी थी कीमतें
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच टकराव के चलते इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई थी। सप्लाई चेन पर संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो हाल के वर्षों में सबसे ऊंचे स्तरों में से एक था।
कीमतों में आई बड़ी गिरावट
सीजफायर की घोषणा के बाद बाजार ने तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। लंबे समय तक 100 डॉलर के ऊपर रहने के बाद अब तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड में करीब 15 प्रतिशत की कमी आई और यह गिरकर 94.82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। वहीं अमेरिकी बेंचमार्क WTI में लगभग 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जो 97.12 डॉलर पर आ गया।
यह गिरावट इसलिए भी अहम है क्योंकि मार्च में युद्ध के कारण तेल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक की तेज बढ़ोतरी हुई थी, जो किसी एक महीने में असाधारण मानी जाती है। इस वजह से वैश्विक स्तर पर बड़ा ऊर्जा संकट खड़ा हो गया था, जिसे 1970 के दशक के बाद सबसे गंभीर स्थिति माना जा रहा था।
वैश्विक असर और राहत
होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के कारण खाड़ी देशों के साथ-साथ कई विकासशील देशों में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ी थीं। सप्लाई में कमी के चलते महंगाई भी बढ़ी। अब हालात सामान्य होने की उम्मीद है, जिससे तेल और गैस की आपूर्ति बेहतर होगी।
भारत के लिए राहत क्यों?
भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में कीमतों में आई गिरावट से देश का आयात बिल घटेगा, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा और रुपये को मजबूती मिल सकती है।
LPG और ईंधन आपूर्ति में सुधार
ईरान संकट के दौरान भारत में एलपीजी की सप्लाई भी प्रभावित हुई थी। अब खाड़ी देशों से आयात आसान होने की उम्मीद है, जिससे घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुधरेगी। परिवहन लागत घटने से आम लोगों को महंगाई से राहत मिलने की संभावना भी बढ़ गई है।
