Breaking: भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में निर्यात के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार 860 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक, अप्रैल से मार्च के दौरान कुल निर्यात 860.09 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल के 825.26 अरब डॉलर के मुकाबले 4.22% ज्यादा है। यह देश की वैश्विक व्यापार में मजबूत होती स्थिति को दर्शाता है।
वस्तु निर्यात में भी हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली। यह 2024-25 के 437.70 अरब डॉलर से बढ़कर 441.78 अरब डॉलर हो गया। मार्च 2026 में 38.92 अरब डॉलर का निर्यात दर्ज किया गया, जो पूरे साल का सबसे ऊंचा मासिक स्तर रहा। वहीं आयात में गिरावट आई और फरवरी के 63.71 अरब डॉलर से घटकर मार्च में 59.59 अरब डॉलर रह गया, जिससे व्यापार घाटा कम होकर 20.67 अरब डॉलर पर आ गया।
हालांकि, सालाना आधार पर वस्तु निर्यात में 7.44% की कमी भी दर्ज की गई, लेकिन पेट्रोलियम उत्पादों और इंजीनियरिंग सामान की मजबूत मांग ने कुल निर्यात को सहारा दिया। मशीनरी, ऑटो पार्ट्स और औद्योगिक उपकरणों की बढ़ती मांग से इंजीनियरिंग सेक्टर ने अच्छा प्रदर्शन किया, वहीं मांस और डेयरी उत्पादों के निर्यात में भी बढ़ोतरी हुई।
सरकार ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए एमएसएमई सेक्टर को भी राहत दी है। फरवरी-मार्च के दौरान 5.27 लाख से ज्यादा क्रेडिट गारंटी जारी की गई, जिनकी कुल राशि 92,000 करोड़ रुपये से अधिक रही। इसके अलावा, छोटे उद्योगों के लिए नई क्रेडिट योजनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
रिजर्व बैंक ने बिना गारंटी वाले लोन की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी है, जिससे छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी। सरकार एमएसएमई संगठनों के साथ मिलकर उन्हें सस्ती दरों पर कच्चा माल उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम कर रही है। हाल के महीनों में 20 लाख से अधिक एमएसएमई ने उद्यम पोर्टल पर पंजीकरण कराया है, जिससे देश में पंजीकृत एमएसएमई की संख्या 8 करोड़ से ज्यादा हो गई है।
