Health Alert: एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारत में लोग 2024 के दौरान कुल 1.1 ट्रिलियन घंटे स्मार्टफोन पर बिताते रहे, यानी औसतन हर व्यक्ति रोज करीब 5 घंटे स्क्रीन पर रहता है। यह बढ़ता स्क्रीन टाइम अब सेहत के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ज्यादा स्क्रीन देखने की आदत सबसे पहले नींद को प्रभावित करती है। नींद की कमी सिर्फ थकान ही नहीं लाती, बल्कि दिमाग की कार्यक्षमता पर भी असर डालती है। रिसर्च बताती है कि इससे मेमोरी से जुड़ी संरचनाएं कमजोर होने लगती हैं और सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है। द लैंसेट कमीशन (2024) ने तो नींद की समस्याओं को डिमेंशिया के प्रमुख कारणों में भी शामिल किया है।
इसका असर सिर्फ दिमाग तक सीमित नहीं रहता। फ्रंटियर्स इन माइक्रोबायोलॉजी (2023) में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, ज्यादा स्क्रीन टाइम और खराब नींद हमारे गट माइक्रोबायोम को भी प्रभावित करते हैं, जिससे शरीर के अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ सकता है। यही वजह है कि स्क्रीन की लत से एंग्जायटी, स्ट्रेस और लो मूड जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं।
एक्सपर्ट Dr. Aaron Hartman के अनुसार, नींद, तनाव और गट हेल्थ आपस में गहराई से जुड़े हैं—एक भी गड़बड़ हुआ तो बाकी पर भी असर पड़ता है। वहीं जेरोसाइंस (2024) की स्टडी बताती है कि रात में आर्टिफिशियल लाइट के संपर्क में रहने से शरीर में सूजन बढ़ती है, जो दिमाग तक पहुंचकर न्यूरोइन्फ्लेमेशन का कारण बन सकती है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर देती है।
Dr. John La Puma ने इस स्थिति को “डिजिटल ओबेसिटी” नाम दिया है, जहां स्क्रीन की लत धीरे-धीरे शरीर और दिमाग दोनों को नुकसान पहुंचाती है। हर नोटिफिकेशन के साथ मिलने वाला डोपामिन दिमाग को उसी तरह प्रभावित करता है, जैसे किसी नशे की आदत।
Disclaimer: यह जानकारी विभिन्न रिसर्च और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी बदलाव से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
