Alert: गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) के राजनगर एक्सटेंशन निवासी हरीश राणा एक सामान्य युवक थे, लेकिन हाल ही में उनके मामले ने सभी को झकझोर दिया। कोर्ट ने उन्हें निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसके बाद यह सवाल फिर चर्चा में आ गया कि आखिर Quadriplegia क्या होता है और यह कितना खतरनाक है।
What is Quadriplegia: हरीश राणा का मामला लोगों के लिए एक चेतावनी बनकर सामने आया है। चोट लगने के बाद वे करीब 13 साल तक कोमा जैसी स्थिति में रहे। अंततः परिवार ने ‘राइट टू डाई विद डिग्निटी’ के तहत कोर्ट से अपील की, जिसे मंजूरी मिल गई। इस संदर्भ में डॉक्टरों ने बताया कि क्वाड्रिप्लेजिया एक बेहद गंभीर मेडिकल कंडीशन है।
डॉ. सुमोल रत्ना (सहायक प्रोफेसर, चिकित्सा विभाग, NIIMS मेडिकल कॉलेज, ग्रेटर नोएडा) के अनुसार, क्वाड्रिप्लेजिया वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति के दोनों हाथ और दोनों पैर पूरी तरह काम करना बंद कर देते हैं। यह आमतौर पर रीढ़ की हड्डी यानी स्पाइनल कॉर्ड में गंभीर चोट के कारण होता है।
यह पैरालिसिस का एक उन्नत रूप है, जिसमें गर्दन के नीचे का पूरा शरीर प्रभावित हो जाता है। मरीज न तो हाथ-पैर हिला पाता है और न ही सामान्य रूप से सांस ले पाता है। कई बार ऐसी स्थिति में व्यक्ति पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो जाता है।
कैसे होता है क्वाड्रिप्लेजिया?
इसका मुख्य कारण स्पाइनल कॉर्ड इंजरी होता है। खासकर जब गर्दन के पास (सर्वाइकल स्पाइन) चोट लगती है, तो दिमाग से शरीर के बाकी हिस्सों तक सिग्नल पहुंचना बंद हो जाता है। इसके चलते शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं।
सड़क हादसे, ऊंचाई से गिरना, खेल के दौरान चोट लगना या किसी भारी चीज के दबने से यह समस्या हो सकती है। बाइक चलाने वालों में इसका खतरा ज्यादा होता है, क्योंकि दुर्घटना के समय सिर और गर्दन पर सीधा असर पड़ता है।
अगर हेलमेट सही तरीके से न पहना हो या स्पीड ज्यादा हो, तो चोट गंभीर हो सकती है। कई बार गिरते समय शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है और स्पाइनल कॉर्ड को नुकसान पहुंचता है।
लक्षण क्या हैं?
क्वाड्रिप्लेजिया के लक्षण तुरंत भी दिख सकते हैं और धीरे-धीरे भी विकसित हो सकते हैं, जैसे—
- हाथ-पैरों का काम करना बंद होना
- शरीर में सुन्नपन या झनझनाहट
- सांस लेने में परेशानी
- पेशाब और मल पर नियंत्रण खत्म होना
- कमजोरी या पूरा लकवा
क्या इसका इलाज संभव है?
क्वाड्रिप्लेजिया का पूरी तरह इलाज आज भी मुश्किल माना जाता है। हालांकि, कुछ मामलों में सर्जरी, फिजियोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन के जरिए स्थिति में सुधार लाया जा सकता है। समय पर इलाज मिलने से नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता है, लेकिन पूरी तरह ठीक होना बेहद दुर्लभ है।
हरीश राणा का मामला इस बात की गंभीर याद दिलाता है कि सड़क सुरक्षा, खासकर बाइक चलाते समय, कितनी जरूरी है।
