Breaking: अंबाला छावनी में वाहन पंजीकरण से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें बाहरी राज्यों—खासकर दक्षिण भारत—के वाहनों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए हरियाणा में रजिस्टर किया जा रहा था। जांच में अब तक 200 से ज्यादा मामलों में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु और नगालैंड जैसे राज्यों के वाहनों को अंबाला के नकली पतों पर दर्ज किया गया। इसका मकसद कम रजिस्ट्रेशन फीस का फायदा उठाना और टैक्स से बचना था। अब तक 213 ऐसे वाहनों की पहचान हो चुकी है, जिनका पंजीकरण संदिग्ध तरीके से किया गया। अनुमान है कि हर वाहन पर 1 से 2 लाख रुपये तक की अवैध वसूली की गई।
कई वाहन ऐसी कंपनियों के नाम पर दर्ज पाए गए, जो असल में मौजूद ही नहीं हैं। उदाहरण के तौर पर, एक हाइड्रोलिक मोबाइल क्रेन ‘के.पी. कंस्ट्रक्शन’ के नाम पर रजिस्टर थी, लेकिन जांच में गांव में ऐसी कोई कंपनी नहीं मिली और उसका मालिक तमिलनाडु का निकला। इसी तरह एक अन्य क्रेन ‘एसआर क्रेन सर्विसेज’ के नाम पर दर्ज थी, जिसका मालिक कोयंबटूर का रहने वाला पाया गया।
जांच में नियमों की खुलेआम अनदेखी भी सामने आई। जरूरी फॉर्म 20, 21 और 22 फाइलों में नहीं मिले, सिर्फ बिना सत्यापन की फोटोकॉपी मौजूद थी। न ही वैध बीमा दस्तावेज थे और न ही मोटर वाहन निरीक्षक का प्रमाण पत्र। इसके अलावा, अंबाला में निवास से जुड़ा कोई ठोस प्रमाण भी जमा नहीं कराया गया था।
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जांच समिति ने इसे राजस्व को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने और गलत मंशा से किया गया कृत्य बताया है। नियमों के अनुसार, वाहन का पंजीकरण उसी स्थान पर होना चाहिए जहां मालिक वास्तव में रहता हो।
रिपोर्ट में यह भी संकेत मिले हैं कि इतने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा बिना प्रशासनिक मिलीभगत के संभव नहीं है। अब इस बात की भी जांच की जा रही है कि कहीं इन फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल चोरी के वाहनों को चलाने के लिए तो नहीं किया जा रहा था। यह रिपोर्ट अंबाला के उपायुक्त को सौंप दी गई है और जल्द ही इस मामले में पुलिस केस दर्ज होने की संभावना जताई जा रही है।
