State Drug Controller Ripan Mehta ने हरियाणा के दवा नियमन तंत्र को नई दिशा देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उनका मुख्य उद्देश्य प्रदेश में दवाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता और आम जनता के हितों को सर्वोपरि रखना है। हाल ही में दिए गए एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने अपने अनुभव, कार्यशैली और भविष्य की प्राथमिकताओं को विस्तार से साझा किया।
सबसे युवा ड्रग कंट्रोल ऑफिसर (डीसीओ) के रूप में अपनी सेवाएं शुरू कीं
वर्ष 1971 में हिसार में जन्मे श्री रिपन मेहता ने 1992 में बी. फार्मा की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 1995 में हरियाणा एफडीए में राज्य के सबसे युवा ड्रग कंट्रोल ऑफिसर (डीसीओ) के रूप में अपनी सेवाएं शुरू कीं। तीन दशक से अधिक के अपने लंबे अनुभव में उन्होंने अंबाला, गुरुग्राम, फरीदाबाद, कुरुक्षेत्र, रेवाड़ी और पंचकूला जैसे महत्वपूर्ण जिलों में डीसीओ और सीनियर डीसीओ के रूप में कार्य करते हुए दवा नियमन व्यवस्था को मजबूत किया। उनके उत्कृष्ट कार्य के आधार पर उन्हें वर्ष 2011 में सीनियर ड्रग कंट्रोल ऑफिसर, वर्ष 2021 में असिस्टेंट स्टेट ड्रग कंट्रोलर (एएसडीसी) और वर्ष 2025 में उप राज्य औषधि नियंत्रक (डीएसडीसी) के पद पर पदोन्नत किया गया था।
दवा नियमन उनके लिए केवल एक जिम्मेदारी नहीं बल्कि एक पारिवारिक विरासत भी है। उनके पिता भी हरियाणा एफडीए में असिस्टेंट स्टेट ड्रग कंट्रोलर के पद से वर्ष 1998 में सेवानिवृत्त हुए थे, जिससे उन्हें इस क्षेत्र की समझ और जिम्मेदारी का अनुभव बचपन से ही मिला।
अपने कार्यशैली को लेकर श्री मेहता ने साफ कहा कि वे केवल एक सख्त रेगुलेटर के रूप में ही नहीं, बल्कि एक सलाहकार और मार्गदर्शक की भूमिका भी निभाएंगे। उनका मानना है कि उद्योग और नियामक के बीच संतुलन और सहयोग से ही बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
उन्होंने दवा की गुणवत्ता को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका स्पष्ट संदेश है कि मैन्युफैक्चरर वही दवा बनाए और विक्रेता वही दवा बेचे, जिसे वह अपने खुद के बच्चों को देने में हिचकिचाए नहीं। साथ ही उन्होंने कहा कि आम जनता तक सही दवा सही कीमत पर पहुंचना ही विभाग का मूल उद्देश्य होना चाहिए।
100 प्रतिशत बिलिंग पर ही दवा की खरीद करें
रिटेल और होलसेल कारोबारियों के लिए उन्होंने सख्त दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि 100 प्रतिशत बिलिंग पर ही दवा की खरीद करें, नो बिल, नो डील का सख्ती से पालन किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि केवल विश्वसनीय स्रोतों से ही दवाएं खरीदी जाएं और अपने सप्लायर, चाहे वह मैन्युफैक्चरर हो या होलसेलर, की लाइसेंस कॉपी हमेशा अपने पास रखें। इसके अलावा नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकना भी सभी की जिम्मेदारी है।
मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी इकाइयों को रिवाइज्ड शेड्यूल एम के प्रावधानों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करना होगा। साथ ही उन्होंने उद्योगों को आश्वासन दिया कि विभाग की ओर से आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग भी प्रदान किया जाएगा, ताकि गुणवत्ता और अनुपालन दोनों को बेहतर बनाया जा सके।
