Update: बिहार की राजनीति में आज बड़ा बदलाव देखने को मिला। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, वहीं बीजेपी नेता नितिन नवीन ने भी अपने एमएलए पद से त्यागपत्र सौंप दिया। दोनों नेता हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने गए हैं और अब राष्ट्रीय राजनीति में अपनी नई पारी शुरू करेंगे।
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन तय माना जा रहा है। अब नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी, जिससे राज्य की सियासत में नया अध्याय जुड़ने वाला है। यह फैसला राज्य की सत्ता संरचना में बड़े बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है।
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर काफी लंबा और अहम रहा है। उन्होंने 1985 में हरनौत सीट से विधायक बनकर राजनीति में कदम रखा था। इसके बाद 1989 में वे पहली बार लोकसभा पहुंचे। 2006 से वे लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे और अब पहली बार राज्यसभा के सदस्य के रूप में अपनी नई भूमिका निभाएंगे। इस उपलब्धि के साथ वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं, जो चारों सदनों—विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा—के सदस्य रह चुके हैं।
इस्तीफे से पहले पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास पर हलचल तेज रही। जदयू के कई वरिष्ठ नेताओं ने नीतीश कुमार से मुलाकात की और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की। इस बैठक में पार्टी के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी ने राजनीतिक गतिविधियों को और तेज कर दिया।
नीतीश कुमार ने अपने करियर में केंद्र सरकार में रेल मंत्री, कृषि मंत्री और भूतल परिवहन मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद भी संभाले हैं। 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने राज्य का नेतृत्व किया और ‘सुशासन बाबू’ के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। शराबबंदी, साइकिल योजना और पंचायती राज में महिलाओं को 50% आरक्षण जैसे फैसले उनके प्रमुख कार्यों में गिने जाते हैं।
