Update: प्रधानमंत्री मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के बीच मंगलवार (24 मार्च 2026) को फोन पर अहम बातचीत हुई, जिसमें क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने खासतौर पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर चिंता जताई और इसे मिलकर मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। मौजूदा हालात में ये रास्ते बेहद अहम हैं, क्योंकि इनके जरिए ही दुनिया भर में जरूरी सामान और ऊर्जा की सप्लाई होती है।
मिडिल ईस्ट संकट पर चर्चा
बातचीत में पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के बिगड़ते हालात पर भी गंभीर विचार-विमर्श हुआ। यहां जारी संघर्ष का असर वैश्विक स्तर पर दिखने लगा है, खासकर ऊर्जा क्षेत्र में। तेल और गैस सप्लाई में रुकावट से कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। दोनों देशों ने शांति और स्थिरता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।
समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर
दोनों नेताओं ने कहा कि समुद्री रास्तों का खुला और सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है। खासकर हॉर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण मार्ग, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है, वहां किसी भी बाधा से वैश्विक संकट पैदा हो सकता है। अगर ये रास्ते प्रभावित होते हैं, तो तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिसका असर आम लोगों पर भी पड़ेगा।
ट्रंप से भी हुई बातचीत
इसी दिन पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी के बीच भी फोन पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट के हालात और बढ़ते तनाव पर अपने विचार साझा किए। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत शांति और स्थिरता का समर्थन करता है और जल्द तनाव कम होना चाहिए।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर भारत पर भी पड़ रहा है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। लगभग 60 फीसदी तेल और गैस यहां से आते हैं। ऐसे में सप्लाई बाधित होने पर ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से भारत कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय है और सहयोगी देशों के साथ मिलकर समाधान खोजने की कोशिश कर रहा है, ताकि किसी बड़े आर्थिक झटके से बचा जा सके।
