Khajan Das : उत्तराखंड में धामी कैबिनेट का विस्तार हुआ है, जहां खजान दास समेत पांच विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। खजान दास को राजपुर रोड (देहरादून) से विधायक रहते हुए यह जिम्मेदारी मिली है। उनका यह राजनीतिक सफर सरलता, समर्पण और जनता के प्रति सच्ची निष्ठा का प्रतीक है।
खजान दास का जन्म 16 जून 1958 को हुआ। वे भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं। 2007 में पहली बार धनोल्टी विधानसभा से विधायक चुने गए और उस दौरान शिक्षा मंत्री के रूप में भी काम किया। बाद में खेल मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। 2017 और 2022 के चुनावों में राजपुर रोड (अनुसूचित जाति आरक्षित) सीट से लगातार जीत हासिल की।
आठवीं पास होने के बावजूद उनकी राजनीतिक समझ, क्षेत्रीय विकास के प्रति समर्पण और सादगी भरी जीवनशैली ने उन्हें जनता के बीच खास जगह दिलाई। उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वे हमेशा सादगी से जीवन जीते हैं – देहरादून के आशिर्वाद एन्क्लेव, बल्लीवाला में रहते हैं।
असली पहचान उनकी सीधी-सादी और सहज प्रवृत्ति
खजान दास की असली पहचान उनकी सीधी-सादी और सहज प्रवृत्ति है। जब वे धनोल्टी से विधायक थे, तब मेरी उनसे मुलाकात देहरादून के एमएलए हॉस्टल में हुई। उस समय उन्हें दांत में भयंकर दर्द था – बात करने में भी बहुत तकलीफ हो रही थी। फिर भी उन्होंने मेरे साथ लंबी बातचीत की। हमने साथ चाय पी और उत्तराखंड की राजनीति, विकास कार्यों, जनसमस्याओं पर गहन विमर्श किया। दर्द से जूझते हुए भी उन्होंने खेद जताया कि “दर्द की वजह से शायद बात करने में असुविधा हो रही हो”।
यह छोटा-सा वाक्य उनके व्यक्तित्व की सादगी और मेहमाननवाजी को पूरी तरह दर्शाता है – जहां पद या सत्ता का कोई घमंड नहीं, बल्कि इंसानियत और सम्मान सबसे ऊपर था।
यह व्यक्तिगत अनुभव मुझे आज भी याद है। खजान दास जैसे नेता दुर्लभ हैं, जो दर्द सहकर भी दूसरों की बात सुनते हैं और जनहित को प्राथमिकता देते हैं। धनोल्टी से शुरू हुआ उनका सफर अब कैबिनेट मंत्री तक पहुंचा है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में जहां विकास की चुनौतियां बड़ी हैं, वहां ऐसे अनुभवी और सरल नेता की जरूरत हमेशा महसूस होती है।
कैबिनेट विस्तार भाजपा की रणनीति का हिस्सा है, लेकिन साथ ही उन नेताओं को सम्मान देने का प्रतीक भी, जिन्होंने बिना शोर-शराबे के लगातार सेवा की। खजान दास की सरलता हमें सिखाती है कि सच्ची राजनीति हृदय की सादगी से होती है, न कि दिखावे से। उम्मीद है कि नई जिम्मेदारी में भी वे उसी समर्पण और जन-सरोकार के साथ काम करेंगे।
