Breaking: ट्रंप के लिए ईरान संकट बना सबसे बड़ी परीक्षा—यूरेनियम कब्जा, होर्मुज खोलना और जंग खत्म करना बड़ी चुनौती,सत्ता परिवर्तन और परमाणु कार्यक्रम रोकने के नाम पर शुरू हुआ हमला अब ट्रंप के लिए उलझनों का जाल बन गया है। 32 दिनों से जारी इस जंग ने साफ कर दिया है कि हालात उनके काबू में नहीं हैं। होर्मुज से लेकर खार्ग तक कई मोर्चों पर अमेरिका दबाव में है और रणनीति बार-बार बदलती दिख रही है।
यूरेनियम पर कब्जा आसान नहीं
ईरान की भूमिगत परमाणु साइट्स से 60% तक संवर्धित 440 किलो यूरेनियम हासिल करना बेहद जोखिम भरा मिशन है। अलग-अलग गुप्त ठिकानों पर फैला यह नेटवर्क अमेरिकी ऑपरेशन को और जटिल बना देता है।
खार्ग पर कब्जा भी अधूरा समाधान
भले ही खार्ग से ईरान का बड़ा तेल निर्यात होता हो, लेकिन सिर्फ इस पर नियंत्रण से कोई बड़ा फायदा नहीं होगा। ईरान के पास आसपास कई विकल्प हैं और वह टैंकरों को निशाना बना सकता है।
होर्मुज खोलना बड़ी चुनौती
तेल और गैस सप्लाई की लाइफलाइन माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना बेहद मुश्किल है। इसकी संकरी भौगोलिक स्थिति और ईरान की नजदीकी खतरे को और बढ़ाती है।
पावर प्लांट हमलों का खतरा
ईरान ने चेतावनी दी है कि उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ तो वह पूरे मिडिल ईस्ट के पावर प्लांट्स को निशाना बना सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
पानी संकट भी बन सकता है हथियार
डिसेलिनेशन प्लांट्स पर हमले से खाड़ी देशों में पानी की सप्लाई ठप हो सकती है, जिससे लाखों लोगों पर असर पड़ेगा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन भी होगा।
अमेरिकी ठिकानों पर हमले
ईरानी हमलों में कई अमेरिकी और सहयोगी बेस प्रभावित हुए हैं, जिससे अमेरिका को अपनी रणनीति बदलकर दूर से युद्ध लड़ना पड़ रहा है।
रडार और निगरानी सिस्टम पर चोट
ईरान के हमलों में अमेरिका के अहम एयरबोर्न रडार सिस्टम भी नष्ट हुए हैं, जिससे उसकी निगरानी क्षमता कमजोर हुई है।
घटता घरेलू समर्थन
लंबे युद्ध से बचने का वादा करने वाले ट्रंप को अब अपने ही देश में विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जिससे राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है।
